इंदौर. दिगंबर जैन समाज के 8 दीक्षार्थी 6 अक्टूबर को आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के सानिध्य में दीक्षा लेंगे। उनके जीवन में ऐसा क्या हुआ जो उन्होंने अच्छी एजुकेशन, बेहतर नौकरी और संपन्न परिवार को छोड़कर संन्यास को अपना लिया।
बचपन से तय था कि इसी मार्ग पर जाना है
- 29 साल के शिवम उज्जैन के रहने वाले हैं। हायर सेकंडरी की पढ़ाई तक आचार्य विशुद्ध सागर को टीवी में देखा और सुना था।
- तब से ही मन में अध्यात्म की ओर प्रेम जागृत हो गया। टीवी में देखकर ही तय कर लिया था कि अगर शिष्य बनेंगे तो विशुद्ध सागरजी के ही बनेंगे।
- माता-पिता ने मना किया, लेकिन मैं नहीं माना और 2010 में आचार्य के पास आ गया।

तीन बेटियों और पत्नी को छोड़कर आ गए
- 43 साल के अतुल एमपी के भिंड के रहने वाले हैं। मोबाइल डिस्ट्रीब्यूटर का काम छोड़ चार साल से आचार्य का साथ पकड़ा है।
- परिवार में पत्नी और तीन बेटियां 17, 15 और 11 साल की हैं। बच्चों को पूरी स्वतंत्रता दे दी है, ताकि वे अपने जीवन में स्वयं कुछ कर सकें।
- मेरे साथ पत्नी ने भी वैराग्य के लिए मन बना लिया है आैर जल्दी ही वह भी दीक्षा लेंगी।
इंजीनियरिंग का आखिरी पेपर छोड़ आया
- 28 साल के आशीष एमपी के टीकमगढ़ के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि पांच साल से आचार्यश्री के साथ हूं।
- माता-पिता इंजीनियरिंग पूरी करते ही मुझे सरकारी नौकरी में लगवाना चाहते थे। मैं 2012 में इंजीनियरिंग का आखिरी पेपर देने जैसे ही परीक्षा हॉल में पहुंचा तो पता नहीं क्या हुआ और वापस लौट आया।
- आचार्यश्री के प्रवचन सुनने व उनसे आशीर्वाद लेने का मौका कई बार मिला। इन्हीं सब बातों ने वैराग्य की ओर खींच लिया।
8 साल की उम्र से ही जागा वैराग्य भाव...
- 19 साल के भरत टीकमगढ़ के रहने वाले हैं। वे 10वीं के बाद 3 साल से आचार्यश्री के साथ हैं।
- भरत कहते हैं, "जब मैं 8 साल का था तब नानी के घर एक दीक्षार्थी आए थे। उनसे मिलकर काफी प्रभावित हुआ।"
- "छतरपुर में 2014 में महाराजश्री से कहा कि दीक्षा लेनी है तो उन्होंने कहा कि माता-पिता से आज्ञा लेकर आओ।"
- "घर आया और 25 दिन तक कुछ नहीं बताया। जब बताया तो डांट पड़ी। फिर एक दिन आचार्यश्री के पास आ गया।"
मन में बात आई और सब कुछ त्याग दिया
- 35 साल के दीपक पंढरपुर, महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। हाई स्कूल पास करने के बाद होमगार्ड में नौकरी कर रहे थे।
- उनकी कई बार ऐसी जगहों पर ड्यूटी लगी, जहां पर आचार्य और मुनि के प्रवचन होते थे।
- प्रवचन में महाराजश्री ने एक बार कहा कि पैसे और स्त्री, इन दोनों के लिए ही महाभारत का युद्ध हुआ था।
- वर्तमान में भी यही हाे रहा है। यही बात दीपक के मन में बैठ गई और सब कुछ छोड़ दिया।

- 19 साल के भरत टीकमगढ़ के रहने वाले हैं। वे 10वीं के बाद 3 साल से आचार्यश्री के साथ हैं।
- भरत कहते हैं, "जब मैं 8 साल का था तब नानी के घर एक दीक्षार्थी आए थे। उनसे मिलकर काफी प्रभावित हुआ।"
- "छतरपुर में 2014 में महाराजश्री से कहा कि दीक्षा लेनी है तो उन्होंने कहा कि माता-पिता से आज्ञा लेकर आओ।"
- "घर आया और 25 दिन तक कुछ नहीं बताया। जब बताया तो डांट पड़ी। फिर एक दिन आचार्यश्री के पास आ गया।"
मन में बात आई और सब कुछ त्याग दिया
- 35 साल के दीपक पंढरपुर, महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। हाई स्कूल पास करने के बाद होमगार्ड में नौकरी कर रहे थे।
- उनकी कई बार ऐसी जगहों पर ड्यूटी लगी, जहां पर आचार्य और मुनि के प्रवचन होते थे।
- प्रवचन में महाराजश्री ने एक बार कहा कि पैसे और स्त्री, इन दोनों के लिए ही महाभारत का युद्ध हुआ था।
- वर्तमान में भी यही हाे रहा है। यही बात दीपक के मन में बैठ गई और सब कुछ छोड़ दिया।

MBA बाद नौकरी व बिजनेस भी किया
- 38 साल के अमित भोपाल के रहने वाले हैं। एमबीए करने के बाद तीन साल तक शेयर ब्रोकिंग कंपनी में काम किया। बाद में खुद की फ्रेंचाइजी शुरू की और दो साल तक अच्छे से चलाया।
- 2003 से आचार्यश्री की देशना सुनने का मौका मिलता रहा। धार्मिक संस्कार माता-पिता ने बचपन से ही दिए थे।
- 2014 में आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लिया और छह महीने पहले ही आचार्यश्री के सानिध्य में आ गया।

माँ और पिता चाहते थे कलेक्टर बनूं
- 21 साल के अक्षय मालथौन सागर के रहने वाले हैं। उन्होंने 12वीं में 85% व पीएमटी क्लियर किया। मां डॉक्टर और पिता कलेक्टर बनाना चाहते थे।
- अक्षय के मुताबिक, 2011 में ललितपुर में पंचकल्याणक में गया था। एक मुनि ने पूछा कि यहां क्या कर रहे हो।
- मैंने कहा- आचार्यश्री के दर्शन को आया हूं तो उन्होंने मेरा हाथ आचार्य के हाथ में रख दिया। 2014 से आचार्यश्री के सानिध्य में हूं।

बीई करने के बाद छह साल नौकरी भी की
- 31 साल के रोहित राजस्थान के रामगढ़ के रहने वाले हैं। बीई के बाद 6 साल पुणे और मुंबई में जॉब किया।
- इस दौरान आचार्यश्री से शोलापुर में आशीर्वाद लिया। उनके ज्ञान और चरित्र से ऐसा प्रभावित हुआ कि मन में वैराग्य का बीज अंकुरित हो गया।
- उन्होंने कहा कि फैमिली की जिम्मेदारी को लेकर परिजन ने काफी समझाया, लेकिन मैं अपना लक्ष्य तय कर चुका था।
- 38 साल के अमित भोपाल के रहने वाले हैं। एमबीए करने के बाद तीन साल तक शेयर ब्रोकिंग कंपनी में काम किया। बाद में खुद की फ्रेंचाइजी शुरू की और दो साल तक अच्छे से चलाया।
- 2003 से आचार्यश्री की देशना सुनने का मौका मिलता रहा। धार्मिक संस्कार माता-पिता ने बचपन से ही दिए थे।
- 2014 में आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लिया और छह महीने पहले ही आचार्यश्री के सानिध्य में आ गया।

माँ और पिता चाहते थे कलेक्टर बनूं
- 21 साल के अक्षय मालथौन सागर के रहने वाले हैं। उन्होंने 12वीं में 85% व पीएमटी क्लियर किया। मां डॉक्टर और पिता कलेक्टर बनाना चाहते थे।
- अक्षय के मुताबिक, 2011 में ललितपुर में पंचकल्याणक में गया था। एक मुनि ने पूछा कि यहां क्या कर रहे हो।
- मैंने कहा- आचार्यश्री के दर्शन को आया हूं तो उन्होंने मेरा हाथ आचार्य के हाथ में रख दिया। 2014 से आचार्यश्री के सानिध्य में हूं।

बीई करने के बाद छह साल नौकरी भी की
- 31 साल के रोहित राजस्थान के रामगढ़ के रहने वाले हैं। बीई के बाद 6 साल पुणे और मुंबई में जॉब किया।
- इस दौरान आचार्यश्री से शोलापुर में आशीर्वाद लिया। उनके ज्ञान और चरित्र से ऐसा प्रभावित हुआ कि मन में वैराग्य का बीज अंकुरित हो गया।
- उन्होंने कहा कि फैमिली की जिम्मेदारी को लेकर परिजन ने काफी समझाया, लेकिन मैं अपना लक्ष्य तय कर चुका था।
बचपन से तय था कि इसी मार्ग पर जाना है
- 29 साल के शिवम उज्जैन के रहने वाले हैं। हायर सेकंडरी की पढ़ाई तक आचार्य विशुद्ध सागर को टीवी में देखा और सुना था।
- तब से ही मन में अध्यात्म की ओर प्रेम जागृत हो गया। टीवी में देखकर ही तय कर लिया था कि अगर शिष्य बनेंगे तो विशुद्ध सागरजी के ही बनेंगे।
- माता-पिता ने मना किया, लेकिन मैं नहीं माना और 2010 में आचार्य के पास आ गया।

तीन बेटियों और पत्नी को छोड़कर आ गए
- 43 साल के अतुल एमपी के भिंड के रहने वाले हैं। मोबाइल डिस्ट्रीब्यूटर का काम छोड़ चार साल से आचार्य का साथ पकड़ा है।
- परिवार में पत्नी और तीन बेटियां 17, 15 और 11 साल की हैं। बच्चों को पूरी स्वतंत्रता दे दी है, ताकि वे अपने जीवन में स्वयं कुछ कर सकें।
- मेरे साथ पत्नी ने भी वैराग्य के लिए मन बना लिया है आैर जल्दी ही वह भी दीक्षा लेंगी।
- 28 साल के आशीष एमपी के टीकमगढ़ के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि पांच साल से आचार्यश्री के साथ हूं।
- माता-पिता इंजीनियरिंग पूरी करते ही मुझे सरकारी नौकरी में लगवाना चाहते थे। मैं 2012 में इंजीनियरिंग का आखिरी पेपर देने जैसे ही परीक्षा हॉल में पहुंचा तो पता नहीं क्या हुआ और वापस लौट आया।
- आचार्यश्री के प्रवचन सुनने व उनसे आशीर्वाद लेने का मौका कई बार मिला। इन्हीं सब बातों ने वैराग्य की ओर खींच लिया।





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