*जैन धनवान है फिर भी सर्वांगीण विकास में पिछे क्यो ?*
भारतवर्ष के इतिहास के पन्नो मे जैनो का योगदान दिखाई नही देता है ।आज हमारा संख्या बल भी घटता जा रहा है । हमारे से छोटी कौम पारसी जो संख्या मे एक लाख से कम है , भारत के इतिहास के पन्नौ पर उनके सर्वांगीण विकास की छबी हमे दिखाई देती है । टाटा , गोदरेज एंवम वाडिया उद्योग जगत के जाने माने नाम है । आर्ट एंवम कल्चर मे परसीस खम्भाटा , बोमन ईरानी एंवम जुबेन मेहता , जाने पहचाने नाम है । राजनीती मे मेडम कामा , दादाभाई नवरोजी एंवम फिरोजशाह मेहता मशहूर हुए है । कानून मे नानी पालखीवाला , फली नरीमान एंवम सोली जहांगीर ने अपना नाम कमाया । फिल्ड मार्शल मानेकशॉ , एयर मार्शल एस्पी इन्जिनीयर एंवम लेफ्टिनेंट कर्नल तारापोर जैसे रत्न , पारसी समुदाय से भारतीय सेना को प्राप्त हुए । भारत उनकी जन्मभूमि नही थी , फिर भी शरणार्थी बनकर आये पारसीयो ने , अपनी कर्मभूमि के इतिहास मे , स्वर्णिम अक्षरो मे अपनी उपस्थिती दर्ज करवा ली है ।
अब हमे समझना होगा कि पारसीयो ने ऐसा क्या किया जिससे उनका हर क्षैत्र मे सर्वांगीण विकास हो पाया मगर हमारा नही हुआ । पारसीयो ने तीन बातो पर ध्यान केंद्रित किया । यह तीन बाते हम सही तरीके से नही कर पाये ।
1) गलत धंधो से दुर रहना एंवम अपनी साख बनाये रखना ।
2) अपनी दौलत को अपने साधार्मीक भाई बहनो के उत्कर्ष के लिए वापरना ।
3) शिक्षा एंवम नयी तकनीक को अपनाने मे हमेशा तत्पर रहना ।
2) अपनी दौलत को अपने साधार्मीक भाई बहनो के उत्कर्ष के लिए वापरना ।
3) शिक्षा एंवम नयी तकनीक को अपनाने मे हमेशा तत्पर रहना ।
पारसीयो ने देश को बैंगलोर स्थित पहला सांइस इंस्टीट्यूट ,मुंबई मे पहला केन्सर अस्पताल ,इंस्टीट्यूट आफ सोस्यल सांइस , इंस्टीट्यूट ऑफ फन्डामेंटल रिसर्च एंवम नेशनल सेंटर आॅफ परफॉर्मीग आर्ट जैसी श्रेष्ठतम संस्थाये प्रदान की ।
हम पारसीयो की तरह मेहनती , इन्टरप्राइसींग एंवम धन कमाने की काबिलियत वाली कौम है मगर हमारा सारा ध्यान पुण्य अर्जन करने के साधनो के निर्माण पर केन्द्रित हो गया । साधार्मीक सेवा पर हमारा ध्यान कमजोर होने की वजह से हमारे समाज का सर्वांगीण विकास नही हो पाया । शिक्षा को तत्परता से अपनाने मे भी हमारी रूची धीमी रही जिसकी वजह से हम शीर्ष के स्थानो पर नही पहुंच पाये।
*अब आनेवाले समय मे जैन समाज को गौरवशाली बनाना है तो हमे अपना सारा ध्यान साधार्मीक उत्कर्ष सेवा, उच्च शिक्षा एवं अत्याधुनिक तकनीक पर केंद्रित करना होगा ताकी आनेवाला समय जैनो का स्वर्णिम युग कहलाये ।*
*अब आनेवाले समय मे जैन समाज को गौरवशाली बनाना है तो हमे अपना सारा ध्यान साधार्मीक उत्कर्ष सेवा, उच्च शिक्षा एवं अत्याधुनिक तकनीक पर केंद्रित करना होगा ताकी आनेवाला समय जैनो का स्वर्णिम युग कहलाये ।*



No comments:
Post a Comment