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ठाणे: जैन धर्म की अनूठी पहेचान रही हैं जिसका एक अनोखा अवसर ठाणे तेरापंथ भवन में हाल ही में दिखाई दिया। जहा सम्प्रदायों की सीमा को छोड़ दो महान संत एक मंच पर जन हित को ध्यान में रखते हुए उपस्थित हुए। इस अनोखे संयोग के साक्षी सैकड़ो की संख्या में उपस्थित श्रावक समाज बने। जी हां ठाणे जैन मंदिर जो कि टेम्भी नाका में स्थित है वहां चर्तुर्मासिक महापर्व के उपलक्ष्य में विराजमान परम पू. मुनिराज श्री जयप्रभ विजयजी म.सा.(J P Guruji) और ठाणे तेरापंथ भवन में विराजमान आचार्य महाश्रमण जी के आज्ञनुवर्ती शिष्य आगम मनीषी प्रो. महेंद्र कुमार जी, मुनिश्री अजित कुमारजी, मुनिश्री अभिजीत कुमारजी, मुनिश्री जागृत कुमारजी, मुनिश्री सिद्ध कुमारजी के सानिध्य में भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ।
समाज हित को ध्यान में रखते हुए सुबह 10 बजे जैन मंदिर से विहार कर तेरापंथ भवन माजीवाड़ा ठाणे में क्रांतिकारी प्रवचनकार परम पु.मुनिराज श्री J P गुरुजी पधारें जिनका स्वागत संपूर्ण ठाणे समाज ने श्रद्धा भाव से किया। कार्यक्रम की शुरुआत नवकार महामंत्र से शुरू हुआ। वहीं JP गुरुजी म.सा. का हार्दिक स्वागत और अभिनन्दन श्री भिक्षु महाप्रज्ञ ट्रस्ट ठाणे द्वारा किया गया। साथ साथ ही ठाणे के श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक ट्रस्ट के ट्रस्टमण्डल का भी अभिनंदन और आभार व्यक्त किया गया।



JP गुरुजी म.सा ने अपने प्रवचन में फरमाया की तेरापंथ धर्म संघ सबसे ज्यादा अनुशासित धर्म संघ है। उसकी वजह है कि धर्म संघ का नेतृत्व और धर्म संघ में मार्गदर्शन आचार्य भिक्षुजी, आचार्य श्री तुलसी जी, आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी और वर्तमान के आचार्य महाश्रमण जी का मिल रहा है।
मुनि श्री प्रो. महेंद कुमार जी महाराज जैन धर्म विविधताओं में एकता का धर्म है। जैन धर्म अनेकांत का धर्म है, समन्वय का धर्म इसमें जितनी डुबकी लगाई जाए उतने नए रहष्य उजागर होते है। जैन धर्म में संप्रदाय अलग है पर संतों के विचार एक ही हैं। मुनि श्री अभिजीत कुमार जी ने कहा कि जनरेशन गैप आज की सबसे बड़ी समस्या है। यह जरूरत है माता पिता को सजग रहने की जरूरत हैं।



बहरहाल भारी संख्या में मूर्तिपूजक समाज के श्रावक एवं ठाणे तेरापंथ समाज एवं ठाणे समाज के पद्धिकारियों की उपस्थिति रही।

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