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100 करोड़ से ज्यादा की प्रॉपर्टी और हर महीने लाखों की कमाई छोड़कर एक कपल संत बन गया है। नीमच में बड़े बिजनेस घराने से ताल्लुक रखने वाले इस शख्स ने लंदन से बिजनेस का डिप्लोमा किया है तो वहीं, पत्नी ने इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर जॉब भी कर चुकी हैं। क्या है मामला...


-नीमच शहर के सेठ नाहरसिंह राठौर के बेटे और बहू ने हर महीने की लाखों की कमाई और परिवार की करीब 100 करोड़ की संपति, तीन साल की बेटी को छोड़ संन्यास ले लिया है।
- नाहरसिंह के पोते सुमित राठौर ने 23 सितंबर और पत्नी अनामिका ने 25 सितंबर को सूरत को जैन दीक्षा लेकर जैन संत बन गए हैं।



बेटी की फिक्र नहीं, कहते हैं इसी से आया आत्मकल्याण का बोध

-बेटी आठ महीने की हुई, तभी सुमित और अनामिका ने शीलव्रत यानी ब्रह्मचर्य ले लिया।परिजनों के अनुसार तब से लगने लगा कि ये दीक्षा ले सकते हैं, लेकिन इतना जल्दी निर्णय ले लेंगे, यह नहीं सोचा था। बच्ची के बारे में कहने पर उनके आध्यात्मिक तर्क सब पर भारी पड़ गए।
- यह तक कहा कि यह बच्ची बहुत पुण्यशाली है, इसलिए इसके गर्भ में आते ही हमारे में आत्म कल्याण का बोध आ गया था।



एक महीने पहले टल गई दीक्षा पर निर्णय से पीछे नहीं हटे

-22 अगस्त को पर्युषण का चौथा दिन था। सुमित ने आचार्य रामलाल की सभा में खड़े होकर कह दिया कि मुझे संयम लेना है। आचार्य ने सबसे पहले पत्नी की आज्ञा को जरूरी बताया। अनामिका ने कह दिया कि मैं भी दीक्षा लूंगी। यदि दोनों की दीक्षा हो तो आज्ञा है। सुनते ही दोनों ओर के परिवार सूरत गए और समझाया। तीन साल की बेटी का हवाला देते हुए इजाजत नहीं दी। इस वजह से दीक्षा टल गई, लेकिन दोनों अडिग रहे।




मां और पिता से अब नहीं होगा कोई रिश्ता

- सुमित ने 23 सितंबर को और अनामिका ने 25 सितंबर को सूरत में एक नई जिंदगी की शुरुआत कर दी, लेकिन इभ्या की नई जिंदगी तो 22 अगस्त से शुरू हुई है। उस दिन सूरत में माता-पिता ने दीक्षा लेने का फैसला लिया था। अब उनका किसी से कोई रिश्ता नहीं होगा। इभ्या से भी नहीं।



एक माह पहले ही बड़े भाई के नाम कर दी वसीयत

- सुमित अनामिका अपनी दीक्षा से पहले ही 2 साल 10 माह की बेटी इभ्या को उसके ताऊ यानी सुमित के बड़े भाई अमितेश के नाम कर चुके थे।
- इसके लिए सुमित-अनामिका अमितेश और उनकी पत्नी का एक संयुक्त शपथ पत्र बनाया गया।
- इस वसीयत को अब नीमच कोर्ट में रजिस्टर्ड कराया जाएगा। मामले में अब सूरत पुलिस कमिश्नर का कहना है कि कानून सम्मत प्रक्रिया निश्चित होने से अमानिका की दीक्षा हो पाई।
- परिवार संघ ने बिना किसी पूर्व घोषणा के सुबह सादगीपूर्ण ढंग से दीक्षा विधि पूरी की।
- फिलहाल इभ्या अपने नाना-नानी के घर कपासन में रह रही है।

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